महात्मा गांधी जी ने पाँच बार नोबेल के किए सिफारिश की, पर फिर भी उनको नोबेल नहीं मिला, क्योंकि

हाल ही में ग्रेटा थुनबर्ग नाम का लड़का दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चित है क्योंकि इस बालक को 16 वर्षीय में ही नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया। आश्चर्य करने वाली बात तो यह है कि, महज 16 साल की उम्र में ही ग्रेटा को नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया, जो की आम बात नही है। इसी की तरह अहिंसा और शांति के सिद्धांतों पर चलते हुए महात्मा गांधी को भी इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया। हालांकि, उन्हें प्रत्येक बार शुल्क के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं मिल पाया।

महात्मा गांधी को 1937, 1938, 1939, 1947 और आखिरकार 1948 में पांच बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया। 20 वीं शताब्दी में, अहिंसा, शांति और सच्चाई पर चलने वाले, महात्मा गांधी जी को भारत सहित पूरे संसार मे जाना जाता था। 1937 में गांधी जी के योगदान पर, प्रो.वॉप्स मुलर को एक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया। लेकिन गांधीजी के इन विचारों के लिए कई लोग उन्हें नापसन्द करते थे। उन्होंने कहा कि गांधी के विचार भारत पर लागू हो सकते हैं, लेकिन पश्चिमी संस्कृति में ये बाते महत्वपूर्ण नहीं हैं इसलिए गांधी जी की ऐसी विचार द्वारा के लिए उस समय उन्हें नोबेल पुरस्कार नहीं मिला पाया।

बाद में, 1938 और 1937 में, नोबेल समिति ने इसी तरह के विचार के लिए गलत कारण दिए, उन्होंने कहा महात्मा गांधी जी का आंदोलन अहिंसक है, इसलिए उनका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए खारिज कर दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह विचार किसी भी समय हिंसक रूप से बढ़ सकती है। फिर 1947 में, महात्मा गांधी को चौथी बार नोबेल के लिए नामित किया गया। लेकिन नोबेल समिति के पांच में से सिर्फ तीन सदस्यों ने महात्मा गांधी के खिलाफ वोट किया। जिन लोगो ने महात्मा गांधी जी के विपक्ष में वोट दिये उसका कारण भारत-पाकिस्तान विभाजन था। 1947 का यह नोबेल पुरस्कार क्वेकर्स को दिया गया।

1948 में, महात्मा गांधी को पांचवीं बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया। लेकिन इससे पहले कभी को भी मरणोपरांत पुरस्कार नहीं दिया गया। नोबेल समिति पहली बार इस नतीचे पर पहुंची कि महात्मा गांधी को मरणोपरांत पुरस्कार तो दिया जाना चाहिए। लेकिन किसी कारण पुरस्कार विजेता स्वीडिश फाउंडेशन ने मंजूरी नहीं दी। इसलिए गांधी जी को पुरस्कार से नही दिया गया। उस समय, नोबेल फाउंडेशन के कई सदस्य नाराज थे कि महात्मा गांधी को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया। दलाई लामा को 1989 में शांति का नोबेल पुरस्कार भी दिया गया। यह नोबेल समिति के अध्यक्ष द्वारा महात्मा गांधी को समर्पित किया गया।

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