प्रेग्नेंसी में प्रेग्नेंट महीला को मंदिर जाना चाहिए या नहीं ?

दोस्तो, कई प्रेग्नेंट महिलाओ के मन मे यह बात जरूर रहती है कि प्रेगनेंसी के द्वारा मंदिर जाना चाहिए या नहीं। शास्त्रों के अनुसार प्रेग्नेंट महिलाओं को 5 महीने पूरे होने के बाद और छठे महीने से जैसे ही जैसे ही आपका छठवा महीना शुरू होता है, तब आपको मंदिर नहीं जाना चाहिए। इसका यह मतलब है कि प्रेग्नेंसी के दौरान छठवें महीने से प्रेग्नेट महिलाओं को मूर्तियों, देवी-देवताओं को स्प्रश नहीं करना चाहिए और ना ही मंदिर जाना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सब वर्जित माना गया है। जब प्रेग्नेंट महिला का पांचवा महीना खत्म हो जाता है और छठवे महीने की शुरुआत होती है, तो वे मानसिक और शारीरिक रूप से शुद्धता में नहीं रहती है, क्योंकि पूजा में शुद्धता और पवित्रता होना बहुत जरूरी होता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को छठवें महीने से मंदिर नहीं जाना चाहिए।

मंदिर ना जाने के साथ अगर आप घर पर ही शिवलिंग को जल अभिषेक करते हैं तो वह भी आपको नहीं करना चाहिए। जैसे ही आप का छठवां महीना शुरू होता है। तो आप जल अभिषेक भी ना करें।

दोस्तों हमारे हिंदू धर्म में पूजा-पाठ को लेकर बहुत सारे नियम बनाये गए है। इसलिए प्रेगनेंसी के दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं को गर्भ दोष ना लग जाए गर्भवती महिला को बहुत सावधानी रखनी चाहिए।

दोस्तों, मंदिर नही जाने का मतलब यह नही की आप  प्रेगनेंसी के दौरान पूजा पाठ नहीं कर सकती। हर महिला का भगवान की पूजा करने का पूरा अधिकार होता हैं। इसलिए आप घर मे अपने रोजाना पूजा कर सकते है। यह बहुत जरूरी भी हैं। भगवान की पूजा करने से मन शांत रहता हैं और तनाव भी कम रहता हैं। इससे आपका बच्चा संस्कारी भी रहता है। इसलिए आपको रोजाना पूजा करना है बस आपको छठवें महीने से देव स्पर्श बिल्कुल भी नही करना है, मंदिर नही जाना है। बस घर पर ही पूजा-पाठ करना है।

बिना देव स्पर्श किये, बिना मंदिर जाए आप घर पर ही पूजा-पाठ, गीता पाठ, ग्रन्थों का पाठ, रामायण पढ़ना आदि सब कर सकते है। अगर आप भगवान शिवजी पर जल अभिषेक करना चाहती है, तो आप अपने पति से या घर के अन्य सदस्यों के साथ कर सकते है। बस आपको मंदिर नही जाना है और देव स्पर्श नही करना है।

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