UP गेट : सामने आई किसान आंदोलन के टेंट की सच्चाई, निकल रही है किसान आंदोलन की हवा

नई दिल्ली/गाजियाबाद : किसान आंदोलन की शुरुआत से ही यूपी गेट पर भी प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. महीनों बाद अब धीरे-धीरे यूपी गेट पर जारी किसान आंदोलन फुस्स होते जा रहा है. कहने को तो यह किसान आंदोलन है, लेकिन इसमें अब प्रदर्शनकारी नज़र नहीं आ रहे हैं. ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, धरना-प्रदर्शन में गिनती के प्रदर्शनकारी बचे हैं. लेकिन यहां पर महीनों से लगे टेंट यथावत हैं.

गौरतलब है कि, किसान आंदोलन की शुरुआत 26 नवंबर से दिल्ली से सटी सीमाओं के साथ हुई थी. वहीं 28 नवंबर से यूपी गेट पर भी धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया गया था. बता दें कि, प्रदर्शनकारी किसानों ने फ्लाईओवर के नीचे, संपर्क मार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग-नौ और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की दिल्ली जाने वाली लेन पर महीनों से टेंट लगाकर कब्जा कर रखा है. अब हालात यह है कि, न ही टेंट के भीतर और न ही टेंट के भीतर प्रदर्शनकारी देखने को मिल रहे हैं.

निकली किसान आंदोलन की हवा….

गौरतलब है कि, यूपी गेट पर किसान आंदोलन भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में चल रहा है, इसके बावजूद अब किसान आंदोलन की हवा निकल रही है. वहीं भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत भी यूपी गेट पर भीड़ जुटाने में असमर्थ नज़र आ रहे हैं. वे एक महीने के दौरान 2 बार महापंचायत कर चुके हैं, इसके बावजूद गिने-चुने प्रदर्शनकारी यूपी गेट पर मौजूद है.

लगे है इतने टेंट…

जानकारी के मुताबिक़, यूपी गेट पर 25 बड़े, 70 मंझले और सौ छोटे टेंट लगे हैं. बता दें कि, बड़े टेंट में 40, मंझले में 10, छोटे में दो प्रदर्शनकारियों के ठहरने का स्थान है. कुल मिलकर देखा जाए तो सभी टेंट में 1900 प्रदर्शनकारी एक बार में ठहर सकते हैं. हालांकि यह आंकड़ा बहुत दिनों से देखने को नहीं मिला है. अब महज तीन सौ से चार सौ प्रदर्शनकारी ही यूपी गेट पर कृषि कानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

लंगर खाली, सड़कें सूनी…

गुरुवार की बात की जाए तो गुरुवार को लंगर भी पूरी तरह खाली रहे और यूपी बॉर्डर पर सड़कें भी खाली नज़र आई. लेकिन दूसरी तरफ रास्ता बंद होने के कारण लाखों वाहनों को हर दिन चक्कर काटने पड़ते हैं. फिलहाल देखना होगा यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा.

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