भारत के लोगों को अब लगाई जाएगी रूसी कोरोना वैक्सीन, Covishield और Covaxin से है ज्यादा असरदार

भारत सरकार ने आज कोविड-19 वैक्‍सीन Sputnik V के इस्तेमाल को मंजूरी दे ही है। जिसके साथ ही देश में अब तीन कोरोना की वैक्सीन का प्रयोग किया जा सकता है। आज सरकारी पैनल की ओर से ये मंजूरी रूस देश की इस वैक्सीन को दी गई है। आपको बता दें कि देश Sputnik V वैक्‍सीन का फेज 3 ट्रायल चल रहा है और फेज 3 ट्रायल के अंतिम नतीजों में Sputnik V वैक्‍सीन की एफेकसी 91.6% पाई गई है।

इस समय भारत में कोरोना वायरस के दो टीकों- Covishield और Covaxin का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन दोनों वैक्सीन को जनवरी 2021 के पहले हफ्ते में इस्तेमाल करने की मंजूरी सरकार की ओर से दी गई थी। वहीं कई लोगों के मनों में अब ये सवाल उठ रहा है कि इन तीनों में से कौन सी वैक्सीन सबसे अधिक असरदार साबित होगी।

फेज 3 ट्रायल के अंतरिम नतीजों पर नजर डाली जाए तो Sputnik V वैक्‍सीन की एफेकसी 91.6% पाई गई है। भारत बायोटेक की Covaxin ने फेज 3 क्लिनिकल ट्रायल में 81% की एफेकसी हासिल की थी। जबकि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की Covishield की एफेकसी 62% दर्ज हुई थी। लेकिन डेढ़ डोज देने पर एफेकसी 90% तक पहुंच गई थी। यानी एफेकसी के मामले में Sputnik V वैक्‍सीन पहले स्थान पर है।

इन तीनों वैक्सीन की कुल दो डोज लेनी होती है। हर वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद जो दूसरी डोज ली जाती है। उसमें कुछ हफ्तों का अंतर होता है। Covishield की दो डोज 4-8 हफ्तों के अंतराल पर दी जाती हैं। इसे स्‍टोर करने के लिए जीरो तापमान (शून्‍य से कम) की जरूरत नहीं है।

Covaxin की दो डोज 4-6 हफ्तों के अंतराल पर दी जाती हैं। इसे भी 2-8 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान पर स्‍टोर करते हैं।
Sputnik V 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच स्‍टोर की जाती है और इसकी भी कुल दो डोज लेनी होती है।

मुफ्त में लग रही है वैक्सीन

Covishield और Covaxin को इस समय सरकारी अस्‍पतालों में मुफ्त में लगाया जा रहा है। जबकि प्राइवेट अस्‍पताल में जाकर अगर ये वैक्सीन लगाई जाती है। तो 250 प्रति डोज का शुल्‍क देना पड़ रहा है। सरकार सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक को 150 रुपये प्रति डोज दे रही है।

वहीं Sputnik V की भारत में कीमत अबतक स्‍पष्‍ट नहीं है। हालांकि ये टीका 10 डॉलर प्रति डोज से कम का बताया जा रहा है। लेकिन ये दवाई रूस से लाई जानी हैं। तो ऐसे में इसकी कीमत ज्यादा भी हो सकती है। वहीं जब इस दवा को बनाने का काम भारत में शुरू हो जाएगा। तब इसकी कीमत कम हो सकती हैं।

दरअसल डॉ रेड्डी लैबोरेटरीज से 10 करोड़ डोज बनाने की डील हुई है। इसके अलावा RDIF ने हेटरो बायोफार्मा, ग्‍लैंड फार्मा, स्‍टेलिस बायोफार्मा, विक्‍ट्री बायोटेक से 85 करोड़ डोज बनाने का भी करार कर रखा है। यानी जल्द ही इस दवाई को भारत में बनाना भी शुरू कर दिया जाएगा।

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