देश में इस वजह से रोज़ाना रिकॉर्ड तोड़ रहा है कोरोना वायरस, डॉक्टर्स ने बताई इसकी मुख्य वजह

देश और दुनिया में एक बार फिर कोरोना वायरस अपने पैर पसार रहा है. देश मे इसके हालात और भी बुरे है. दुनिया के कई देश एक बार फिर से लॉकडाउन में चले गए है. इसके साथ ही देश में भी कई राज्यों में भी दोबारा से कुछ दिनों का सख्त लॉकडाउन लगाया जा चुका है. वैक्सीन आने और लगने के बावजदू भी तेज़ी से नए मामले सामने आ रहे है. सरकार भी इस बार लाचार दिखाई दे रही है.

देश के तमाम बड़े शहरों के अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की कमी देखने को मिल रही है. मरीज़ सड़को पर ही दम तोड़ रहे है. लोगों को जरुरी दवाइयां नहीं मिल रही है. इसी बीच कुछ एक्सपर्ट ने बताया है कि, देश में कोरोना अचानक इतनी तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है. इसी मामले में देश के कुछ शीर्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस में बदलाव, चुनाव और अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम और सावधानी बरतने में लापरवाही के कारण बढे हुए मामले सामने आ रहे हैं.

देश के कुछ वैज्ञानिक का कहना है कि, कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का पालन नहीं करना और सुस्त टीकाकरण अभियान तेजी से बढ़ते मामलों के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार माना जा सकता है. इसके साथ ही उन्होंने यह बताया कि लोगो को वैक्सीन लगवाने के बाद भी कोरोना से बचाव संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करना बेहद जरुरी है. उन्होने बताया कि, आने वाले कुछ महीनों में वायरस के स्वरूप और टीके की परस्पर क्रिया भारत और विश्व में कोरोना वायरस का भविष्य तय करेगी.

उन्होंने कहा कि, मामलों के इस तरह से बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यह हो सकती है कि लोगों ने पहली लहर के जानें के बाद लापरवाही करना शुरू कर दिया था. लोगों ने कोविड के नियमों का पालन करना बंद कर दिया था. इसी वजह से वह मामले इस तरह से बढ़ रहे है.

वहीं तमिलनाडु के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज से एक प्रोफेसर का बोलना है कि, जनता द्वारा कोविड-19 बचाव नियमों का पालन नहीं करना ही संक्रमण के तेज़ी से फैलने का कारण है. उनके मुताबिक बचाव नियमों में कमी की शुरुआत केंद्र सरकार की ओर से की गई थी. जिसका बाद में सभी राजनीतिक दलों, सभी धार्मिक समूहों और बड़े स्तर पर आम जनता ने द्वारा फॉलो किया गया.

सरकार द्वारा बिना टीकाकरण किए हुए स्कूल और कॉलेज खोल दिए गए. यह कदम भी दूसरी लहर के लिए एक बड़ा घातक कदम साबित हुआ. जहां भी संक्रमण केस बढ़ रहे थे वहां सरकार को सख्त नियम लागू किये जानें चाहिए थे. लेकिन सरकार द्वारा चुनाव के चलते इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया गया. कोरोना जैसी महामारी के दौरान चुनाव की योजना बड़ी ही सावधानी से बनाई जानी चाहिए थी. वहीं वायरस के बदलते स्वरुप को तेज़ी से फेल रहे संक्रमण का जिम्मेदार माना जा रहा है.

गौरतलब है कि भारत ने वैक्सीनेशन के मामले में शनिवार को बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. देश में अब तक कोरोना की 10 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन लगाई जा चुकी हैं. दूसरे देशों के मुकाबले भारत को ऐसा करने में सिर्फ 85 दिन लगे. जानकारी के मुताबिक देश को अक्टूबर तक 5 और वैक्सीन मिल सकती है.

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